29th November 2020

Bundeli News

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सरपंच, सचिव व रोजगार सहायक की मिलीभगत से ग्राम पंचायत मातोली में हो रहा गोलमाल, आला अधिकारी बेखबर
जेसिबी मशीन की मदद से बिना स्वीकृति के बना दी 2 रोड़


टीकमगढ़ से लोकेंद्र सिंह परमार
टीकमगढ़। ग्रामीण स्तरो पर मनरेगा योजना को शुरू करने के पीछे सरकार का मकसद था। कि ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले गरीब मजदूरों को कम से कम 100 दिन रोजगार मिले। जिससे गरीब मजदूरों को मजदूरी के लिए शहरों की तरफ पलायान नहीं करना पड़े और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो। इसलिए सरकार ने सभी ग्राम पंचायतों को आदेश किया था, कि गांवों में होने वाले विकास कार्यों में मनरेगा के तहत गरीब मजदूरों से मजदूरी कराई जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों की जगह मशीनों से काम कराया जा रहा हैं। भले ही शासन द्वारा ग्रामीण अंचलों में लोकडॉन के चलते निर्माण कार्य आरंभ करने की बात कही गई हो लेकिन निर्माण कार्य के साथ जिम्मेदार अधिकारी द्वारा मोके पर निर्माण कार्य होने के चलते और राशि गमन कर ली गई हो तो इससे रहस्य भरी कहानी शासन की योजनाओं के लिए क्या हो सकती है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में कराए जाने वाले विकास कार्यों को मजदूरों से नहीं कराकर मशीनों से कराया जा रहा है काम। मनरेगा योजनाओं में लूट खसोट करने के लिए नित नये-नये तरकीब इजाद किए जा रहे हैं।
इन सब से अलग जिले की एक पंचायत ऐसी भी हैं, जंहा बिना स्वीकृति के बना दी 2 सुदुल रोड़ जी हां हम बता रहे हैं। टीकमगढ़ पंचायत की ग्राम पंचायत मातोली गावं की बात कर रहे हैं। जहां गांव के बिचो-बिच बिना स्वीकृति के स्थानीय सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक व इंजीनियर की मिलीभगत से पुष्ता कँुआ से सोजनी माता तक व छोड़ के खेरा व मुक्ति धाम से छोटी देवीजी तक 2 सुदुल रोड़ बना दी गई है। जब मामले की जनकारी की तो समने आया की उक्त सडक़ो योजनाओं की अभी तक कोई प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त किए बिना लाखो रूपयो की लागत से 2 सडक़े बन गई। यानी एक पंथ दो काज का यह उदाहरण बना है। उक्त सडक़ निर्माण की जनकारी के लिये जब मीडिय़ा द्वारा ग्रामीणो से पूछा तो बताया की सडक़ निर्माण में जेसीबी मशीन व टैक्टरो का उपयोग कर कार्य को पूरा किया गया है।

मशीन से कराया अवैध खनन
इतना ही नहीं निर्माण कार्यों के लिए इन मशीनों से निर्माण एजेंसी ने अवैध खनन भी किया गया। सुदूर सडक़ के लिये जो मिटटी लग रही है। वही गांव के पास की ही एक सरकारी पहाड़ी को खुद कर वहां से मिट्टी का अवैध खनन कर परिवहन किया जा रहा है। आपको बता दें कि उक्त पहाड़ी को खोजने की अभी तक अनुमति पंचायत के पास नहीं है।

गड्डढ़े से राहगीरों को खतरा-
सडक़ निर्माण के लिए सडक़ किनारे ही कई मीटर लंबाई चौड़ाई वाला तालाबनुमा गड्ढा जेसीबी मशीन से खोदा गया है। गड्डढ़े से निकली मिट्टी का उपयोग सडक़ निर्माण के लिए किया जा रहा है। गड्डढ़े के कारण बरसात के मौसम में हादसे की आशंका बनी रहेगी।

इनका कहना है-अभी मुझे इस विषय में कोई भी जानकारी नहीं है। मैं अभी बाहर हूं। वापस पहुंच कर ही बता सकूंगा। सुनील जैन, सचिव, ग्राम पंचायत मातोली, टीकमगढ़ मुझे अभी पता नहीं है। सुदूर सडक़ पर कोई भी वर्तमान में मास्टर नहीं निकला है। अब सडक़ निर्माण में मशीन चली हो या ना चली हो इसकी जानकारी मेरे पास नहीं है। सरपंच ही बता सकते है कि मशीन चली है या नहीं। महेंद्र लोधी, रोजगार सहायक, ग्राम पंचायत मातोली, टीकमगढ

वही जब इस संबंध में सब इंजीनियर मनोज बडक़ुल से बात करना चाही, तो उन्होंने फोन उठाना उचित नहीं समझा।